ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनेगा भारत
ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनेगा भारत
- भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण की और कदम बढ़ाया है, प्रधानमंत्री के इस मिशन को लेकर केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को मंजूरी दी है।
- केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 19, 744 करोड़ रुपये की लागत वाले 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' को मंजूरी मिल गई।
- प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होगा।''
- इस मिशन के तहत भारत को ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का टारगेट रखा है।
-क्या है ग्रीन हाइड्रोजन मिशन ?
कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरूआत की है। दुनियाभर के देश कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्त्रोत को तलाश रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन यानी हाइड्रोजन गैस का निर्माण, बिना प्रदूषण के। हाइड्रोजन गैस के फॉर्म में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे पानी यानी H2O ने निकाला जाता है। पानी से जब बिजली गुजरती है तो हाइड्रोजन टूटकर अलग हो जाता है। इससे निकलने वाली ऊर्जा साफ और स्वच्छ होती है। इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से H2O को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में कई देश परंपरागत ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इसे ग्रे हाइड्रोजन कहा जाता है। ग्रीन एनर्जी में प्रदूषण ना के बराबर होती है।
-ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से क्या फायदे ?
- ग्रीन हाइड्रोजन की मदद से जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी।
- ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग परिवहन, रासायनिक उद्योग, इस्पात और अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है।
- यह एक अच्छा ऊर्जा विकल्प है और कार्बन उत्सर्जन की समस्या को भी कम करता है।
- यह 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद करेगा। कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी, ग्रीन हाइड्रोजन और संबंधित उत्पादों का निर्यात भी बढ़ेगा।
- इस ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 60 से 100 गीगावॉट क्षमता वाले इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट तैयार होंगे।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 5 मिलियन टन की कमी आएगी।
6 लाख लोगों को नौकरियां मिलेंगी
- केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ''नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस मिशन से 8 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा। इससे 6 लाख लोगों को नौकरियां मिलेंगी । 50 मिलियन टन ग्रीन हाउस उत्सर्जन को कम किया जाएगा।'' उन्होंने बताया, ''382 मेगावाट के सुन्नी बांध हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लिए मंजूर किया गया है। 2,614 करोड़ रुपए की लागत आएगी और यह सतलुज नदी पर बनेगा।''




